Ujhana Chaupal : जींद जिले के नरवाना क्षेत्र के उझाना गांव की चौपाल जिला जींद में ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा की सर्वश्रेष्ठ चौपालों में से एक है, जो सामाजिक व धार्मिक आस्था की प्रतीक है। इस भव्य चौपाल का धर्म का पाला छह गांव उझाना, अंबरसर, ढूंढवा, कोयल, कुराड व नेपेवाला ने मिलकर बांधा था।
इस भव्य इमारत का निर्माण 1974-76 में हुआ था, जहां चौपाल की जगह एक किला हुआ करता था जो अपने आप जर्जर होकर ढह गया था। इस चौपाल के निर्माण के पीछे एक रोचक व दिल को छू लेने वाली कहानी है। जिस बारे में कहा जाता है कि इस गांव का एक कोई बड़ा व्यक्ति किसी दूसरे गांव में किसी काम से गया हुआ था। उस गांव में कोई भूसा व चारे का कूप गिर गया था।
ग्रामीण उसको दोबारा बनाने की कोशिश कर रहे थे। उसी समय उन्होंने उझाना गांव के उस व्यक्ति को आता देखकर ताना मारते हुए कहा कि भाई कोई बात नहीं जो यह कूप गिर गया, इसे दोबारा बना लेंगे। यह उझाना का किला नहीं, जो ढह जाने के बाद दोबारा नहीं बनेगा। यह बात उझाना के उस व्यक्ति को चुभ गई और उसने अपने गांव आकर पंचायत को वह बात बताई।

Ujhana Chaupal : 10 हजार घरों से एकत्रित किए प्रति घर 200 रुपए
लोगों ने इस बात को गंभीरता से लिया और फैसला किया गया कि यहां कोई किला तो नहीं, बल्कि धर्म और भाईचारे की भावना को बढ़ाने के लिए एक विशाल चौपाल का निर्माण जरूर करवाएंगे। इस पर उझाना गांव के लोगों ने खाप में आने वाले सभी छह गांव के लोगों से सलाह मशविरा करके सभी गांव के लगभग 10 हजार घरों से प्रत्येक से 200 रुपए एकत्रित किए।
जिस पर लगभग 20 लाख रुपए चंदे से इसे 6 मंजिला बनाया गया, जोकि डालर की कीमत उस समय 10 रुपये थी। चौपाल के निर्माण में 20 लाख की राशि केवल सामग्री पर लगी थी, जबकि मेहनत और मजदूरी इन्हीं छह गांव के लोगों ने मिलकर खुद की थी। आज उझाना की यह इमारत हरियाणा की सर्वश्रेष्ठ चौपाल मानी जाती है।
Ujhana Chaupal : इस भव्य चौपाल पर खाप के लोगों को है गर्व
यह भव्य चौपाल केवल इमारत नहीं, बल्कि छह गांव के लोगों द्वारा अपनी आन, बान और शान के लिए जानी जाती है। लोगों के भाईचारे की भावना भी इस चौपाल से जुड़ी हुई है। अगर खाप के छह गांव में कोई सामाजिक व धार्मिक विवाद पैदा हो जाता है, तो इस चौपाल में बैठकर जो निर्णय लिया जाता है, वह सभी को मान्य होता है। इसी आस्था को लेकर कोई भी व्यक्ति चौपाल में लिए निर्णय को टालने की कोताही नहीं करता। आजकल खाप के प्रधान रोहतास हैं। उनसे पहले उनके दादा रामस्वरूप प्रधान थे, जिनकी मृत्यु के बाद पोते को यह जिम्मेदारी दी गई।




