Asian games 2026 Jind Players : जापान में चल रहे एशियन गेम्स में जिले की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। संगतपुरा की नीरू ढांडा ने ट्रैप शूटिंग में दो स्वर्ण सहित तीन मेडल जीते हैं। रिटौली की कीर्ति शर्मा ने शुक्रवार को महिला रिकर्व टीम के फाइनल में कोरिया की टीम को 5-3 से हराकर एशियन गेम्स
तीरंदाजी में गोल्ड दिलवाया है। वहीं गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हथवाला गांव की पूजा हिस्सा रही। रेडर पूजा ने टीम को गोल्ड दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। तीनों ही लड़कियां किसान परिवार से आती हैं। नीरू ढांडा तो बीपीएल परिवार से हैं, जिनका एक कमरे का मकान है।
आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव के बावजूद अपनी मेहनत के दम देश को तीन मेडल दिलाकर नीरू लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई। ओवरआल मेडल की बात करें, तो जिले के खिलाड़ियों ने अब तक कुल सात मेडल जीते हैं। डाहौला गांव के हिमांशु ढिल्लों ने एशियन गेम्स 10 मीटर एयर राइफल में व्यक्तिगत और टीम इवेंट में दो सिल्वर मेडल जीते हैं।
Asian games 2026 : खेल सुविधाओं का टोटा, फिर भी देश- दुनिया में लहरा रहे परचम
जिले में खेल सुविधाओं की बात करें, तो स्टेडियमों में पर्याप्त खेल सामान नहीं है। शूटिंग जैसे खेल के तो खेल विभाग के पास जिले में कोच तक नहीं हैं। तीरंदाजी का भी केवल एक कोच है, जोकि नरवाना है। कबड्डी व कुश्ती में तो जिले से खिलाड़ी निकलते रहे हैं। लेकिन अब शूटिंग और तीरंदाजी जैसे खेलों में भी जिले के खिलाड़ी देश व दुनिया में अपना परचम लहरा रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए दूसरे जिलों व राज्यों में जाकर इन खिलाड़ियों ने अभ्यास करके देश के लिए मेडल जीते।
Asian games 2026 : नीरू ढांडा, चूरमा व घी लेकर मिलने पहुंची मां
जींद : ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत व मिक्स्ड इवेंट में दो गोल्ड व टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाली संगतपुरा गांव की नीरू ढांडा वीरवार देर रात जापान से दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची। जहां उनसे मिलने के लिए मां सुदेश देवी चूरमा व घी लेकर पहुंची। बेटी को चूरमा खिलाते हुए गले लगाकर ऐतिहासिक जीत की बधाई दी। उनके साथ नीरू की मौसी मंजू, मामा सोमवीर पहलवान, राममेहर डीपीई व भाई दीपक भी गए हुए थे।
ताऊ के लड़के जसबीर ढांडा ने बताया कि एयरपोर्ट पर कुछ ही देर तक परिवार के सदस्यों की मुलाकात हो पाई। शुक्रवार शाम को दिल्ली से ही नीरू वापस जापान एशियन गेम्स के समापन समारोह में हिस्सा लेने के लिए चली गई। छह अक्टूबर को वे वापस भारत आएंगी। जैसे ही उन्हें गांव में आने का समय मिलेगा, बड़े स्तर पर पूरे गांव की तरफ से सम्मान समारोह किया जाएगा।




