Dussehra news Haryana : जींद। इस बार 2026 में दशहरा 20 अक्तूबर का है और दशहरा नजदीक आते ही रावण, कुभकर्ण, मेघनाथ के पुतलों का जिक्र शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार शहर के दशहरा मैदान में खड़े होने वाले रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले सिर्फ अपने आकार के कारण ही आकर्षण का केंद्र नहीं होंगे। पुतलों में ऐसी तकनीक और प्रयोग किए जा रहे हैं, जिन्हें देखने के लिए लोग खास तौर पर पहुंचेंगे। इस बार 45 फीट ऊंचे रावण की गर्दन घूमेगी, उसकी आंखें हिलती हुई दिखाई देंगी और चेहरा हंसता हुआ नजर आएगा। वहीं कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले 40-40 फीट ऊंचे होंगे।
पुतले बनाने में जुटे संजय, खरतीलाल और पूरनलाल ने बताया कि इस बार कुंभकर्ण के पुतले में भी खास प्रयोग किया जा रहा है। कुंभकर्ण की आंखों में जिंदा कबूतर डालने की तैयारी है। उनका कहना है कि रावण के पुतले में आग लगाए जाने के बाद कबूतरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। इस प्रयोग को लेकर पुतले में विशेष व्यवस्था की जा रही है। उनका दावा है कि दशहरा उत्सव के दौरान यह लोगों के लिए सबसे ज्यादा कौतूहल वाला दृश्य होगा।
Dussehra : एक महीने में तैयार होंगे तीनों पुतले
कारीगरों के मुताबिक तीनों पुतले तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगेगा। फिलहाल बांस, रस्सी, कागज और अन्य सामग्री से पुतलों का ढांचा तैयार करने का काम चल रहा है। इसके बाद इनके चेहरों, कपड़ों और अन्य सजावटी हिस्सों को अंतिम रूप दिया जाएगा। रावण के चेहरे में ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि गर्दन घूमने के साथ उसकी आंखों की हलचल भी दिखाई दे।

Dussehra : छह-सात कारीगर, पूरा परिवार जुटा
संजय ने बताया कि पुतले बनाने के काम में परिवार के छह-सात सदस्य और कारीगर जुटे हुए हैं। पुतले तैयार करना केवल एक काम नहीं, बल्कि उनके परिवार की करीब पांच दशक पुरानी परंपरा है। पिछले 50 वर्षों से उनका परिवार रावण के पुतले बनाता आ रहा है। संजय ने बताया कि उनके नाना और दादा भी यही काम करते थे। उनके पिता ने भी वर्षों तक रावण के पुतले बनाए और अब वह खुद परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
Dussehra : इस बार डेढ़ लाख रुपए का खर्च
कारीगरों ने बताया कि पिछले साल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के तीनों पुतले तैयार करने में करीब एक लाख रुपए खर्च हुए थे। इस बार पुतलों का आकार बढ़ाने के साथ उनमें कई नए प्रयोग किए जा रहे हैं, इसलिए खर्च बढ़कर करीब डेढ़ लाख रुपए पहुंच गया है। उनका कहना है कि पुतलों को तैयार करने में मेहनत के साथ-साथ तकनीकी समझ भी जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी चूक पूरे पुतले की संरचना और दहन के दौरान प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
दशहरा नजदीक आने के साथ ही कारीगरों की व्यस्तता बढ़ती जा रही है। दिन-रात मेहनत कर परिवार इन तीनों पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटा है। अब लोगों को इंतजार है उस शाम का, जब मैदान में 45 फीट का रावण अपनी घूमती गर्दन और हिलती आंखों के साथ नजर आएगा और अग्नि के बीच बुराई के प्रतीक इन पुतलों का दहन होगा।




