Rajat Kandola : 3 बार UPSC की दहलीज तक पहुंचे, इंटरव्यू में चूके तो HCS क्रैक करके हासिल किया 15वां रैंक

Rajat Kandola Uchana : मंजिल पाने का जुनून हो तो नाकामियां रास्ता नहीं रोक सकतीं। जींद जिले के बुडायन गांव के रजत कंदौला ने इसे सच कर दिखाया है। तीन बार UPSC की परीक्षा में सफलता के करीब पहुंचे, लेकिन इंटरव्यू में चयन नहीं हो पाया। इसके बावजूद उन्होंने हौसला नहीं खोया और अपनी मेहनत जारी रखी।

प्रतिदिन 8 से 10 घंटे सेल्फ स्टडी करने वाले रजत ने अब हरियाणा सिविल सर्विस (HCS) परीक्षा में 375.60 अंक हासिल कर 15वां रैंक प्राप्त किया है। फिलहाल राजकीय कॉलेज मोरनी में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रजत की यह सफलता उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो बार-बार असफल होने के बाद अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। हमने रजत कंदौला से बातचीत की, जो परिवार में पहले ऐसे युवा है, जो इस मुकाम तक पहुंचे।

सवाल : हरियाणा सिविल सर्विस परीक्षा में सफलता और 15वां रैंक हासिल कर सामान्य श्रेणी में 375.60 अंक हासिल किए हैं। इस सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?

रजत का जवाब : इस सफलता का श्रेय मेरी मेहनत, मेरे पिता का सबसे ज्यादा सहयोग और उन सभी लोगों को जाता है, जिन्होंने तैयारी के दौरान मेरा मार्गदर्शन किया। मैंने हमेशा अपनी मेहनत पर भरोसा रखा और कभी हार नहीं मानी। मेरी बड़ी बहन ने हमेशा मुझे गाइड किया।

सवाल : आपकी तैयारी का सफर कैसा रहा? क्या शुरुआत से ही सिविल सर्विस में जाने का लक्ष्य था?

जवाब : मैंने वाईएमसीए इलेक्ट्रिक से की थी लेकिन मैं समाज सेवा करना चाहता था, इसलिए बीटैक के बाद मैंने पोलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन की और इसके बाद यूपीएससी की तैयारी की। सिविल सर्विस की तैयारी के दौरान कई चुनौतियां आई लेकिन मैंने तैयारी जारी रखी। मैं अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर रहा और लक्ष्य हासिल करने के लिए नियमित रूप से समय देता रहा।

सवाल : आपने यूपीएससी की परीक्षा भी कई बार दी। उसमें आपको कितनी सफलता मिली?

जवाब : मैंने 2018 से 2023 तक यूपीएससी की परीक्षा दी और इसमें प्री व मुख्य परीक्षा क्लीयर कर फाइनल में पहुंचा लेकिन इंटरव्यू में रह गया। 2022 में एचसीएस के फाइनल में मात्र 2 नंबर से मैं चूक गया था। इसके बाद एचसीएस के तीसरे प्रयास में मैंने सफलता हासिल की। मेरा मानना है कि असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीखना चाहिए।

सवाल : आप फिलहाल सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी के साथ तैयारी करना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?

जवाब : फिलहाल मैं राजकीय कॉलेज मोरनी में सहायक प्रोफेसर हूं। इसी साल मई में मैंने यहां ज्वाइन किया था। नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाना जरूरी था। मैंने अपनी पढ़ाई के लिए नियमित समय निकाला और तैयारी पर पूरा ध्यान दिया।।

सवाल : आप प्रतिदिन कितने घंटे पढ़ाई करते थे और आपकी तैयारी का तरीका क्या था?

जवाब : मैं प्रतिदिन लगभग आठ से दस घंटे सेल्फ स्टडी करता था। मेरी तैयारी में नियमित पढ़ाई और विषयों को समझने पर जोर रहता था। तैयारी के दौरान मैं दिल्ली में ग्रामीण युवा केंद्र के हॉस्टल रहा और यहां सेल्फ स्टडी के अलावा, सीनियर का मार्गदर्शन, मोटिवेशन, गाइडेंस मिला तो वहां से काफी फायदा मिला।

सवाल: आपके परिवार में कौन-कौन हैं और आपकी सफलता पर उनकी क्या प्रतिक्रिया रही?

जवाब : मेरे पिता शक्ति सिंह किसान हैं और मेरी मां गृहणी हैं। छोटी बहन पढ़ाई कर रही है। मेरे पिता और मेरी बड़ी बहन ने मेरा हमेशा साथ दिया। एक साधारण किसान परिवार से होने के बावजूद मुझे कभी निराश नहीं होने दिया। परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया है। जैसे ही चयन की जानकारी मिली, घर में खुशी का माहौल बन गया। परिवार के सदस्यों की खुशी देखकर मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

सवाल: आपकी शैक्षणिक योग्यता क्या है?

जवाब : मैंने बी टैक के बाद एमए तक पढ़ाई की है। इसके बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान दिया और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा। आखिरकार मुझे सफलता मिली। मेरी पहली प्राथमिकता एसडीएम की है।

सवाल: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

जवाब : युवाओं को अपनी मेहनत पर विश्वास रखना चाहिए और असफलता से घबराना नहीं चाहिए। मैंने UPSC और हरियाणा सिविल सर्विस की परीक्षाओं में कई प्रयास किए। हर बार कुछ नया सीखने की कोशिश की और तैयारी जारी रखी। आखिरकार मेहनत का फल मिला। इसलिए युवाओं को धैर्य के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।

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