World Asthma Day 2026 : जींद जिले में अस्थमा रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 10 के आसपास अस्थमा रोगी आ रहे हैं। बहुत से लोगों को इस बीमारी की शुरुआत में पता नहीं चलता। जब उनको इनहेलर की जरूरत पड़ती है, तभी इसके बारे में पता चलता है। यदि शुरुआत में ही बीमारी का पता चल जाए और उपचार किया जाए तो इस बीमारी से बचाव संभव है। जिले में चार हजार के आसपास लोग इनहेलर का प्रयोग करते हैं। यह अस्पताल से दवाई भी लेते हैं।
अस्थमा एक फेफड़ों की बीमारी है। इसमें सांस की नली में सूजन और उसके सिकुड़ने के कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। इससे सीने में जकड़न और घबराहट महसूस होती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को धूल, धुआं से बचकर रहना चाहिए। जिस समय वायु प्रदूषण ज्यादा होता है, यह बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है।
जिन लोगों को घबराहट होती है, सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आती है तो समझ लेना चाहिए कि आपको अस्थमा है। इसमें खांसी भी उठती है। सांस फूल जाता है। काफी देर बाद व्यक्ति को सांस ठीक प्रकार से आता है। सुबह व रात के समय खांसी अधिक होती है। इस कारण बार-बार नींद टूट जाती है।
World Asthma Day : अस्थमा से बचाव के उपाय
इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को धूल, पालतु जानवरों धुएं, पराग कणों और प्रदूषण से बचना चाहिए। धूम्रपान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यदि आपके पास कोई व्यक्ति धूम्रपान भी कर रहा है तो उसका असर भी आप पर पड़ता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को इनहेलर का प्रयोग करना चाहिए। सुबह के समय सैर करनी चाहिए। तेज दौड़ से बचाना चाहिए। जिस समय वायु प्रदूषण बढ़ जाए, उस समय सुबह की सैर बंद कर देनी चाहिए।
अस्थमा रोगियों के लिए धूल और धुआं जहर के समान है। मरीजों को इससे बचना चाहिए। जब वातावरण शुद्ध हो, तभी सैर करनी चाहिए। चिकित्सकों की सलाह के अनुसार दवाइयों व इनहेलर का प्रयोग करना चाहिए। अक्टूबर-नवंबर में जब वायु प्रदूषण अधिक होता है, तब इसका खतरा ज्यादा होता है। किसी व्यक्ति को सुबह व रात के समय खांसी उठती है तो उसे तुरंत जांच करवानी चाहिए।
–डा. विनीता, फिजिशियन नागरिक अस्पताल, जींद
